साइना नेहवाल ने बदली बैडमिंटन की तस्वीर
आज कल सयेना काफी व्यस्त है जब से वो लन्दन से वापस आई है उनको हर समय मीडिया घेरे रहती है.
साइना, ओलंपिक में अपनी उपलब्धि से बेहद खुश हैं. हों
भी क्यों ना. वो ओलंपिक में मेडल हासिल करने वाली भारत की पहली बैडमिंटन
खिलाड़ी हैं.
साइना कहती हैं, "मैं इस बात से बहुत खुश
हूं कि मेरी उपलब्धियों की बदौलत भारत में लोगों की बैडमिंटन के प्रति
दिलचस्पी काफी बढ़ गई है. अब मां-बाप अपने बच्चों को बैडमिंटन खेलने के
लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. भारत में इस खेल की इस बदली हुई तस्वीर के
लिए मैं अपने आपको क्रेडिट देना चाहूंगी."
साइना ने साबित कर दिखाया
कि बैडमिंटन में चीनी खिलाड़ियों के दबदबे को चुनौती दी जा सकती है.
हालांकि साइना, स्वर्ण पदक से चूकने पर थोड़ी निराश जरूर होंगी लेकिन उनके लिए कांस्य पदक जीतना भी बहुत बड़ी उपलब्धि है.
उन्होंने बताया की जब वो पोडियम में खड़ी
थी और उनको कांस्य पदक पहनाया जा रहा था और जब तिरंगा झंडा ऊपर जा रहा था साथ ही
भारतीय दर्शक जोर जोर से उनका नाम पुकार रहे थे, तब वो अपने आंसुओं को
नहीं रोक पाई. सयेना ने कहा की ये उनके जीवन का सबसे यादगार क्षण था.
साइना ने बताया कि लंदन ओलंपिक्स में
उन्हें दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिला और उनके हर मैच के दौरान दर्शक
जोर-जोर से साइना-साइना और भारत माता की जय जैसे नारे लगाते रहे, जिससे
उन्हें ऐसा महसूस ही नहीं हुआ कि वो भारत से बाहर खेल रही हैं.
साइना का कांस्य पदक निर्धारण मैच में
चीनी खिलाड़ी और विश्व नंबर 2 ज़िंग वैंग से था. जिसमें वैंग के घायल होने
की वजह से साइना को जीता घोषित किया गया था और उन्हें कांस्य पदक मिल गया
था. साइना ने कहा, "जिस तरह से मैं खेल रही थी मुझे पूरा यक़ीन था कि मैच
पूरा होता तो मैं ही जीतती."साइना ने कहा कि वो महिला बॉक्सर मेरी कॉम
से भी बेहद प्रभावित हैं, जिन्होंने दो बच्चों की मां होने के बावजूद
जबरदस्त दृढ़ संकल्प दिखाया और लंदन ओलंपिक में भारत के लिए कांस्य पदक जितने का वादा भी किया है .
साइना के कोच पी गोपीचंद ने भी माना कि
साइना के मेडल जीतने के बाद से उनकी हैदराबाद स्थित पी गोपीचंद एकेडमी में
बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों को एडमिशन के लिए ला रहे हैं और उन्हें
मजबूरन एडमिशन बंद करने पड़े हैं.

No comments:
Post a Comment