Sunday, 19 August 2012

आज खुश हूँ

                             आज खुश हूँ


आज खुश हूँ, जो मिल गया
उसके जज्बातों में खुश हूँ
और जो न मिला
उसके अरमानो में खुश हूँ |

आज खुश हूँ

सूखी रोटी के टुकड़े में खुश हूँ
और कभी आधी पकी हुई दाल में खुश हूँ |

आज खुश हूँ

जो दोस्त मिल गए उनकी खुशी में खुश हूँ,
और उनके ना रहने पर,
अपने गमो के सागर में गोते लगा कर खुश हूँ,
आज खुश हूँ ..............

आज खुश हूँ
इलाहाबाद के अल्हडपन में खुश हूँ
और  खुद के अंदर बिखरे हुए
बनारस की खुशबु में खुश हूँ |

आज खुश हूँ ........................................|

आज खुश हूँ

आज खुश हूँ इलाहाबाद के लोगो से
 मिलकर खुश हूँ

आज  खुश हूँ सही और गलत के
बीच के फासले को जानकर खुश हूँ |
आज खुश हूँ

आज खुश हूँ ये जानकर की
मैं कितना गलत था और हूँ
इसलिए आज खुश हूँ |

आज खुश हूँ

आज खुशी इस बात की भी है की
आख़िरकार कैसे लोग अपनी बातो को
तवज्जो देने के लिए काम करते हैं,
यह देख कर आज खुश हूँ |

 आज खुश हूँ..........

आज खुश हूँ यह देखकर की
कैसे लोग दूसरों की परेशानियों को
अपने बीच की चर्चा का विषय बना लेते हैं |

आज खुश हूँ ......................

जो चाहा वो न मिला
और जो न चाहते हुए मुझे मिला
उन्ही बुरइयो को अपने सीने से लगा कर खुश हूँ |
आज खुश हूँ ...............................................................
...............................................................................
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शायद जिंदगी की खुशी यही हैं

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